Monday, 31 October 2011

अपनों की नजर......

कल तक रोक न पायी, 
जिसे लम्बी डगर भी !
उसे भी थका देता है,
अब थोडा सा सफ़र भी !!
इस डर से कभी गौर से,
देखा नहीं तुझको ! 
कहते हैं लग जाती है,
अपनों की नजर भी !!